Posts

Showing posts with the label वख्त

वख्त

वख्त रोकता रहा,  रुक जाओ,  मुझे भी साथ ले लो,  मुझे भी जाना है। मैं तो ठहरा नादान,  अनजानी रास्ते,  अकेली जिंदगी,  अकेला रहकर, यहां क्या करना है। मुझे पता है, तुम लौट कर नहीं आओगे,  ले चलो साथ,  गुजर गया जो गुजर गया, वक्त हो तुम, तुम्हें लौट कर क्या करना है। क्या हम यही रह जाएंगे, तुम्हारी राह तकूंगा, पल - पल बेचैनी, अंधेरा फिर उजाला, उजाला फिर अंधेरा, तेरे चक्रव्यूह में नहीं फसना है। छोड़ मत साथ ले ले, वादे मत कर, मुझे पता है, सबको पता है, तू गुजर गया तो, फिर कहां लौटना है। सच को समझ, अनजान मत बन, साथ हो ले, साथ ले ले, तुझे भी जाना है, मुझे भी जाना है। न कोई अपना, टूट जाता है हर सपना, बात का भरोसा, भरोसे की बात, चंद पल का साथ, हर कोई बेगाना है। न रुक पाया हूं, न रुक पाऊंगा, ठुकरा दे कोई मुझे, उससे पहले गुजर जाऊंगा, तू भी मानता है, मैं भी मानता हूं, न मेरा यहां ठिकाना है, न तेरा यहां ठिकाना है ॥ ©® विनोद सचान