Posts

Showing posts from August, 2018

नफरत

नफरत फैला रहे हो फिर भी अपने को इंसान कहला रहे हो । कैसी विडंबना है तुम्हारे समाज की, खुद को सुपरमैन जता रहे हो ॥ इंसानियत के दलालत की रोटी, बड़े ही मेहनत की कमाई बता रहे हो । वह भूखे रहते हैं तुम खून पीते हो, आरोप उन पर, अपना दामन साफ दिखा रहे हो ॥ तुम्हारा अक्स अब पहचान में आने लगा है, लगातार नए-नए मुखोटे दिखा रहे हो । कब तक छुपाओगे अपनी असलियत को, दिन को छोड़ो अब रात में भी तुम नजर आ रहे हो ॥