अलगाव
विभाजन की रेखाएं
अब प्रकट होने लगी हैं ।
पहले हिंदू-मुस्लिम में
फिर हिंदू-सिक्ख में
फिर अगड़ा-पिछड़ा में
फिर अगड़ा-दलित में
अब काफी से स्पष्ट हो गए हैं॥
जो मनुष्य के अंदर कांटे बो गए हैं ।
आज मनुष्य के शरीर का हर हिस्सा,
अपने देश के हिस्से में बदल रहा है ॥
आदमी का शरीर
देश की तकदीर
सब बदल रही है ।
एक-एक अंग कर रहा है चीत्कार,
एक साथ रहना अब नहीं है स्वीकार ॥
हम अपना राजकाज
सब अलग-अलग चलायेंगे ।
नए सिरे से फिर अपना-अपना देश बनाएंगे ॥
अब प्रकट होने लगी हैं ।
पहले हिंदू-मुस्लिम में
फिर हिंदू-सिक्ख में
फिर अगड़ा-पिछड़ा में
फिर अगड़ा-दलित में
अब काफी से स्पष्ट हो गए हैं॥
जो मनुष्य के अंदर कांटे बो गए हैं ।
आज मनुष्य के शरीर का हर हिस्सा,
अपने देश के हिस्से में बदल रहा है ॥
आदमी का शरीर
देश की तकदीर
सब बदल रही है ।
एक-एक अंग कर रहा है चीत्कार,
एक साथ रहना अब नहीं है स्वीकार ॥
हम अपना राजकाज
सब अलग-अलग चलायेंगे ।
नए सिरे से फिर अपना-अपना देश बनाएंगे ॥
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