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Showing posts from November, 2022

गिरना

गिरना गिरने को क्या है, कहीं गिर जाओ, चलना है, गिरना है, फिर चलना है। सभी गिरते हैं, कोई घर पर गिरता है, कोई सड़क पर गिरता है, कोई पानी में गिरता है, कोई आसमान मे गिरता है, यहां तो लोग खुद में गिर जाते हैं। गिर गया सो गिर गया, कोई पैसे के लिए गिरता है, कोई प्यार के लिए गिरता है, बहाने बहुत हैं गिरने के, न जाने किस-किस लिए गिरता हैं, हद तो तब है, जानबूझकर लोग गिरते जाते हैं। गिर गया तो गिर गया, कोई उठा तो कोई उठकर गिर गया, कोई सम्हला तो फिर फिसल गया, संभलने का भी कोई अंत नहीं, संभल कर भी गिरते जाते हैं। गिरो, और गिरो, बताते हैं मैं ही नहीं, हर कोई तो गिर रहा है, कोई कम तो कोई ज्यादा, गिर जरूर रहा है, गिरने में भलाई गिनाते हैं। अब तो हद हो गई है, कई लोगों के गिरने से ही, समाज में प्रतिष्ठा बढ़ गई है, गिरने का रिकॉर्ड बनाते जाते हैं। देखा देखी, सब गिरने लगे हैं, गिरकर सीना तनने लगे हैं, गिरने की मिसाल बनने लगे हैं, देखते-देखते, समाज बदल गया, गिरने का रिवाज बन गया, अच्छा कुछ बचा ही कहां है, गिरे हुए ही याद किए जाते हैं। अजीब सा लग रहा है, गिरने वालों के सामने, सबका सर झुक रहा है, इन सबके ब...

वख्त

वख्त रोकता रहा,  रुक जाओ,  मुझे भी साथ ले लो,  मुझे भी जाना है। मैं तो ठहरा नादान,  अनजानी रास्ते,  अकेली जिंदगी,  अकेला रहकर, यहां क्या करना है। मुझे पता है, तुम लौट कर नहीं आओगे,  ले चलो साथ,  गुजर गया जो गुजर गया, वक्त हो तुम, तुम्हें लौट कर क्या करना है। क्या हम यही रह जाएंगे, तुम्हारी राह तकूंगा, पल - पल बेचैनी, अंधेरा फिर उजाला, उजाला फिर अंधेरा, तेरे चक्रव्यूह में नहीं फसना है। छोड़ मत साथ ले ले, वादे मत कर, मुझे पता है, सबको पता है, तू गुजर गया तो, फिर कहां लौटना है। सच को समझ, अनजान मत बन, साथ हो ले, साथ ले ले, तुझे भी जाना है, मुझे भी जाना है। न कोई अपना, टूट जाता है हर सपना, बात का भरोसा, भरोसे की बात, चंद पल का साथ, हर कोई बेगाना है। न रुक पाया हूं, न रुक पाऊंगा, ठुकरा दे कोई मुझे, उससे पहले गुजर जाऊंगा, तू भी मानता है, मैं भी मानता हूं, न मेरा यहां ठिकाना है, न तेरा यहां ठिकाना है ॥ ©® विनोद सचान